Chandipura Virus Outbreak: देश के पश्चिम राज्यों में चांदीपुरा वायरस तेजी से पैर पसार रहा है। इस खतरनाक संक्रमण से अब तक 22 बच्चों की मौत हो गईं, जबकि राजस्थान और गुजरात में 35 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए केन्द्र से लेकर राज्य सरकारें तक अलर्ट हैं और विभाग को खास दिशा-निर्देश जारी किए हैं। गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया ने कहा कि, सरकार लगातार वायरस पर नजर बनाए हुए है और स्वास्थ्य विभाग तेजी से इस पर काम कर रहा है। हम आगामी किसी भी तरह की स्थिति से निपटने को तैयार है।
सरकार इस बीमारी को रोकने के लिए वैज्ञानिकों और डॉक्टरों की मदद से बड़े पैमाने पर जांच कर रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय की टीमें राज्य सरकारों के साथ मिलकर लगातार इस बात पर नजर रख रही है कि यह वायरस कहा और कितनी तेजी से फैल रहा है। इसके साथ ही आपातकालीन राहत कार्यों को संभालने वाले मुख्य केंद्र को भी एक्टिव कर दिया गया है ताकि प्रभावित इलाकों में तुरंत मेडिकल सहायता और दवाइयों को पहुंचाया जा सके।
केंद्र सरकार द्वारा भेजी गई इस विशेष टीम (NJORT) में देश के सबसे बड़े चिकित्सा और वैज्ञानिक संस्थानों, जैसे आईसीएमआर (ICMR), एनसीडीसी (NCDC) और पशुपालन विभाग के विशेषज्ञ शामिल हैं। इन वैज्ञानिकों और डॉक्टरों की जांच का मुख्य उद्देश्य इस वायरस को गहराई से समझना है जैसे कि यह कितनी तेजी से फैलता है, इसके मरीजों में क्या-क्या लक्षण दिखते हैं और इसका सही इलाज क्या हो सकता है। इस पूरी रिसर्च से मिलने वाली सटीक जानकारी के आधार पर ही सरकार बीमारी को रोकने के लिए अहम कदम उठाएगी।
क्या है चांदीपुरा वायरस
उल्लेखनीय है कि, ये बहुत खतरनाक वायरस है जो छोटे बच्चों यानि 15 साल से कम उम्र वाले बच्चों में तेजी से फैल रहा है। यह बीमारी बहुत तेजी से बच्चों के दिमाग पर असर करती है। कहा जा रहा है कि समय पर इलाज ना मिलने से यह वायरस बहुत खतरनाक हो जाता है। इससे अब तक देश में करीब दो दर्जन बच्चों की मौत हो चुकी हैं।
बताया जा रहा है कि यह वायरस इंसान से इंसान के सीधे संपर्क यानि छूने या खांसने से नहीं फैलता बल्कि छोटे कीड़ों या मच्छरों के काटने से होता है। इस वायरस का संक्रमण सबसे ज्यादा बरसात में होता है। आमतौर पर मई से लेकर सितंबर तक इसका संक्रमण बना रहता है।
वायरस के लक्षण
बता दें कि, इस बीमारी की शुरुआत अचानक आने वाले तेज बुखार से होती है और लगातार उल्टियां होती हैं जिससे बच्चे में सुस्ती आ जाती है जबकि इस बीमारी का असर सीधे दिमाग पर होता है। इस दौरान संक्रमित बच्चे को दौरे पड़ने शुरू हो जाते हैं। अगर बरसात के मौसम में ऐसा होता है तो एक मिनट भी देरी किए संक्रमित बच्चे को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराएं।
Read Also: इंडोनेशिया में प्रधानमंत्री मोदी सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित, दोनों देशों के बीच हुए कई अहम समझौते
