बृजभूषण शरण सिंह यौन उत्पीड़न मामले में बरी, राउज एवेन्यू कोर्ट का फैसला, जानिए क्या है पूरा मामला

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Brij Bhushan Sharan Singh News: भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के मामले में बरी कर दिया हैं। लंबे समय तक सुर्खियों में रहे इस बहुचर्चित मामले में अदालत के फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह की पहली प्रतिक्रिया भी सामने आई हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अदालत ने अपने फैसले में कहा- कि शिकायतकर्ता के बयानों में कई विरोधाभास पाए गए और लगाए गए आरोप लगभग 10 साल पुराने थे। साथ ही कथित घटनास्थल से जुड़ी लोकेशन भी पीड़िता और आरोपी की मौजूदगी से मेल नहीं खाई। इस पूरे मामले में एक नाबालिग पहलवान पहले ही अपने आरोप वापस ले चुकी थी, जबकि दो अन्य महिला पहलवानों ने अदालत में अपने बयान दर्ज नहीं कराए।

बृजभूषण शरण सिंह ने कोर्ट के फैसले पर कहा- पहले ही दिन मैंने कहा था कि मेरे खिलाफ कोई फैसला आता है या कोई आरोप साबित होता है, तो मैं खुद फांसी पर लटक जाऊंगा। उन्होंने आगे कहा- कि आज कोर्ट ने बाइज्जत बरी किया है। यह मेरे लिए और मेरे प्रशंसकों के लिए प्रसन्नता का विषय है। इससे आगे मैं आज कुछ नहीं कहूंगा।

 बता दें कि बृजभूषण शरण सिंह 20 जुलाई 2023 से नियमित जमानत पर थे। वहीं, 10 मई 2024 को दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के आधार पर अदालत ने उनके खिलाफ आरोप तय किए थे। जिसके बाद इस मामले का ट्रायल शुरू हुआ था।

क्या है पूरा मामला?

WFI के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह से जुड़ा यौन उत्पीड़न का मामला साल 2023 में उस समय चर्चा में आया, जब विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया समेत कई नामी पहलवान दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे। महिला पहलवानों ने आरोप लगाया कि तत्कालीन WFI प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह ने कई वर्षों तक उनका यौन उत्पीड़न किया। साथ ही उन्होंने भारतीय कुश्ती महासंघ में खिलाड़ियों के साथ गलत व्यवहार किए जाने के भी आरोप लगाए।

महिला पहलवानों ने यह भी आरोप लगाया था कि उन्होंने दिल्ली के कनॉट प्लेस थाने में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। इसके बाद 25 अप्रैल 2023 को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जिसके बाद 28 अप्रैल को दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसी दिन एफआईआर दर्ज की जाएगी। इसके बाद छह महिला पहलवानों की शिकायत पर यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज किया गया। वहीं, एक नाबालिग पहलवान की शिकायत पर पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत अलग एफआईआर दर्ज की गई। एफआईआर दर्ज होने के बाद 4 मई को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दिया।

28 मई को नए संसद भवन की ओर मार्च के दौरान पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे पहलवानों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद 30 मई 2023 को पहलवान अपने मेडल गंगा नदी में प्रवाहित करने के लिए हरिद्वार पहुंचे। हालांकि, लोगों के समझाने पर उन्होंने अपने मेडल गंगा में नहीं बहाए। इसके बाद 3 जून 2023 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रदर्शनकारी पहलवानों से मुलाकात की। जिसके बाद पहलवानों ने 15 जून तक अपना आंदोलन स्थगित कर दिया था।

15 जून को दिल्ली पुलिस ने एफआईआर में बृजभूषण शरण सिंह और तत्कालीन सहायक सचिव विनोद तोमर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इसी दिन नाबालिग पहलवान से जुड़े पॉक्सो मामले में क्लोजर रिपोर्ट भी दाखिल कर दी गई। इसके बाद 7 जुलाई को अदालत ने मामले का संज्ञान लिया। 20 जुलाई 2023 को बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को नियमित जमानत मिल गई। फिर 10 मई 2024 को अदालत ने दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया। 21 मई को अदालत ने औपचारिक रूप से आरोप तय किए। हालांकि, बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर ने खुद को निर्दोष बताया और मुकदमे का सामना करने का फैसला किया।

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मामले की सुनवाई के दौरान 25 मई 2025 को अभियोजन पक्ष के अंतिम गवाह की गवाही पूरी हुई। इस दौरान अदालत में कुल 32 गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जबकि अभियोजन पक्ष ने 9 गवाहों को अपनी गवाहों की सूची से हटा दिया। इसके बाद 8 जून 2026 को बृजभूषण शरण सिंह और सह-आरोपी विनोद तोमर के बयान अदालत में दर्ज किए गए। दोनों ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया और खुद को निर्दोष बताया। 9 जून 2026 से मामले में अंतिम बहस शुरू हुई। जो करीब एक महीने तक चली और 2 जुलाई 2026 को पूरी हुई। आज, 3 अगस्त 2026 को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें सबूतों के अभाव में इस मामले से बरी कर दिया है। हालांकि, अदालत का विस्तृत आदेश जारी होने के बाद यह साफ होगा कि किन आधारों पर बृजभूषण शरण सिंह को राहत दी गई हैं।

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