सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने शुक्रवार को सऊदी अरब के मक्का शहर में एक त्रिपक्षीय रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें यह प्रतिबद्धता जताई गई कि "तीनों देशों में से अगर किसी एक देश पर सशस्त्र हमला किया जाता है तो इसे सभी देशों पर आक्रमण माना जाएगा”। इस रक्षा समझौते को ‘मक्का एग्रीमेंट’ के भी नाम से जाना जाएगा।
मक्का संयुक्त रक्षा समझौता, लगभग एक वर्ष की बातचीत के बाद हुआ। मक्का के अल-सफा पैलेस में संयुक्त रक्षा पर मक्का शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया और बाद में इस पर हस्ताक्षर किए गए। इसमें तीनों देशों ने एक दूसरे की सुरक्षा प्रतिबद्धता दोहराई।
शिखर सम्मेलन के बाद जारी एक संयुक्त बयान के मुताबिक, त्रिपक्षीय समझौते का उद्देश्य बाहरी आक्रमण के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध को मजबूत करना और तीनों देशों के बीच सभी सैन्य क्षेत्रों में रक्षा सहयोग को गहरा करना है। इसके अलावा लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक संबंधों, एकजुटता और इस्लामी एकजुटता के बंधनों को मजबूत करने के लिए यह समझौता किया गया है।
सऊदी अरब के कूटनीति मंत्री रायद क्रिमली का कहना है कि हम लंबे समय से इस पर मंथन कर रहे थे यह इस्लामी देशों के बीच सुरक्षा प्रणाली को गहरा और मजबूत करेगा। सुरक्षा क्षेत्र में तीनों देश एक दूसरे के साथ खड़े रहेंगे और बाहरी आक्रमण को निष्क्रीय करने के लिए सैन्य शक्तियों को सशक्त करेंगे। इसके अलावा यह संयुक्त रक्षा क्षमता विकसित करने और परमाणु क्षेत्र में बड़ा कदम है।
क्रिमली ने आगे दोहराया कि यह संधि आंतरिक और बाहरी सुरक्षा कारणों से बेहद अहम है क्योंकि एक देश पर हमला बाकी देशों पर आक्रमण माना जाएगा। संधि के तहत तीनों देश मिलकर आक्रमणकारी का विध्वंस कर देंगे। इस एग्रीमेंट के तहत किसी संगठन या सैन्य संगठन की स्थापना का उद्देश्य नहीं है बल्कि इसका उद्देश्य स्थायी क्षमताओं का विस्तार और विकास करना है।
