Jharkhand JPSC-JSSC Protest: झारखंड की राजनीति और छात्र आंदोलन से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आमरण अनशन पर बैठे झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के केंद्रीय उपाध्यक्ष देवेंद्र नाथ महतो ने अपना वॉटर फास्ट समाप्त कर दिया है। JPSC 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन अब पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन चुका है। खास बात यह है कि देवेंद्र महतो ने किसी सरकारी आश्वासन के बाद नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भावनात्मक अपील पर अपना अनशन तोड़ा। फोन पर हुई बातचीत में वांगचुक ने कहा कि किसी भी आंदोलन का उद्देश्य खुद को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि जनता की आवाज सरकार तक पहुंचाना होता है। इसके बाद देवेंद्र महतो ने पानी पीकर अपना वॉटर फास्ट समाप्त किया। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार छात्रों की मांगों पर क्या फैसला लेती है। आइए जानते हैं कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो, कैसे शुरू हुआ यह आंदोलन और क्या हैं छात्रों की प्रमुख मांगें।
कौन हैं देवेंद्रनाथ महतो?
देवेंद्रनाथ महतो रांची जिले के राहे प्रखंड के कापीडीह गांव के निवासी हैं। उन्होंने वर्ष 2006 में दसवीं और 2008 में विज्ञान विषय से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वर्ष 2017 में रांची विश्वविद्यालय (वर्तमान डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय) से स्नातक की डिग्री हासिल की। आगे चलकर उन्होंने कुरमाली भाषा में स्नातकोत्तर तथा बीएड की पढ़ाई भी पूरी की। उनके पिता विशंभर महतो सेवानिवृत्त शिक्षक हैं।
देवेंद्रनाथ महतो ने अपने आंदोलनकारी सफर की शुरुआत वर्ष 2015 में तत्कालीन नियोजन नीति के विरोध से की। इसके बाद वे छात्रवृत्ति, भर्ती परीक्षाओं और कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दों को लेकर लगातार आंदोलन करते रहे। वर्ष 2019 में JPSC भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ उनका आंदोलन काफी चर्चा में रहा। उनके समर्थकों का दावा है कि JSSC-CGL परीक्षा और जैक की मैट्रिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में हुए आंदोलनों में भी देवेंद्र महतो की महत्वपूर्ण भूमिका रही। छात्र आंदोलनों के साथ-साथ देवेंद्रनाथ महतो ने राजनीति में भी कदम रखा। उन्होंने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा। इसके बाद विधानसभा चुनाव में JLKM के टिकट पर सिल्ली विधानसभा सीट से मैदान में उतरे, जहां उन्हें उल्लेखनीय मत प्राप्त हुए।
कैसे हुई आंदोलन की शुरूआत?
बीती 19 अप्रैल 2026 को 14वीं सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा राज्यभर में आयोजित हुई। इसके बाद 2 जुलाई को इसका परिणाम घोषित किया गया, जिसमें कुल 103 पदों के लिए 2,204 अभ्यर्थियों का मुख्य परीक्षा के लिए चयन हुआ। मुख्य परीक्षा की तारीख 18 से 20 जुलाई तय की गई थी।
रिजल्ट जारी होने के बाद अभ्यर्थियों ने कई सवाल उठाए। उनका आरोप था कि आयोग ने श्रेणीवार कट-ऑफ जारी नहीं किया। इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक कथित OMR शीट वायरल हुई, जिसमें दावा किया गया कि एक अभ्यर्थी ने केवल 48 प्रश्न हल किए थे, फिर भी वह मुख्य परीक्षा के लिए चयनित हो गया। इसके अलावा परिणाम सूची पर आयोग के अध्यक्ष, सचिव या अन्य अधिकृत अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं होने को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे। बढ़ते विवाद को देखते हुए आयोग ने मुख्य परीक्षा स्थगित कर दी।
25 जुलाई को छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो ने रांची के मोरहाबादी मैदान स्थित गांधी प्रतिमा के सामने धरना शुरू किया। हालांकि शुरुआत में इस आंदोलन में सीमित संख्या में छात्र शामिल हुए, लेकिन सोशल मीडिया के जरिए इसे लगातार समर्थन मिलता गया। इसके बाद 26 जुलाई को डूरंड कप फुटबॉल टूर्नामेंट के कारण प्रशासन ने धरनास्थल बदलकर आंदोलन को जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम परिसर में स्थानांतरित कर दिया। तब से प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र वहां पहुंच रहे हैं। सरकार की ओर से आंदोलन को लेकर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आने पर देवेंद्र महतो ने 2 अगस्त से आमरण अनशन शुरू कर दिया। अनशन के दौरान उनका ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल कम होने की जानकारी सामने आई। साथ ही डिहाइड्रेशन और कमजोरी के लक्षण भी दिखाई देने लगे।
छात्रों की प्रमुख मांगें
आंदोलन कर रहे छात्रों ने परीक्षा में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया और कई मांगें रखीं। उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है कि पूरे मामले की जांच केवल CID ही नहीं, बल्कि CBI और ED से भी कराई जाए। परीक्षा आयोजित करने वाली कंपनी TSR Data Processing Private Limited (TDPL) को ब्लैकलिस्ट किया जाए। साथ ही, TDPL द्वारा पूर्व में आयोजित परीक्षाओं की भी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। इसके अलावा JPSC और JSSC में पारदर्शी एवं निष्पक्ष अधिकारियों की नियुक्ति की जाए। मामले की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन कर समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करने की भी मांग की गई।
वर्तमान में क्या है स्थिति?
समय के साथ यह छात्र आंदोलन दो हिस्सों में बंटा हुआ दिखाई देने लगा। एक समूह देवेंद्र महतो के नेतृत्व में आंदोलन जारी रखे हुए है, जबकि दूसरा समूह खुद को किसी राजनीतिक दल से अलग बताते हुए स्वतंत्र मंच से प्रदर्शन कर रहा है। दोनों समूहों की मांगें लगभग एक जैसी हैं, लेकिन नेतृत्व को लेकर मतभेद सामने आए हैं।
फिलहाल राज्य सरकार की ओर से अब तक छात्रों से औपचारिक बातचीत के लिए किसी समिति के गठन की घोषणा नहीं की गई है। हालांकि, विभिन्न राजनीतिक दलों के कुछ नेताओं ने आंदोलन में शामिल छात्रों से मुलाकात जरूर की है। इधर, कुछ ही दिनों में झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत होने वाली है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि आगामी मानसून सत्र के दौरान JPSC परीक्षा विवाद और छात्र आंदोलन का मुद्दा सदन में गूंज सकता है।
