Mumbai FDA Action: महाराष्ट्र में इन दिनों जिस IAS अधिकारी की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह हैं तुकाराम मुंढे। एक ऐसा IAS अफसर जो अपने बेबाक अंदाज और अपने कामों के कारण एक अलग पहचान बनाए हुए है क्योंकि वे न तो किसी की पैरवी सुनते है और न ही किसी भ्रष्ट अधिकारी के खिलाफ एक्शन लेने से कतराते है यही वजह है कि कई लोग उन्हें 'सिंघम IAS' के नाम से भी जानते हैं। करीब दो दशक के प्रशासनिक करियर में 25 बार तबादला झेलने वाले तुकाराम मुंढे इन दिनों काफी सुर्खियों में हैं। और वर्तमान समय में महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त हैं। जिन्होनें पदभार ग्रहण करने के बाद से ही पूरे राज्य में खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए व्यापक अभियान छेड़ दिया है।
होटल, रेस्टोरेंट, डेयरी, मिठाई की दुकान, फूड प्रोसेसिंग यूनिट और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों के खिलाफ व्यापक निरीक्षण शुरू कर दिया है। जांच के दौरान जहां भी खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन, गंदगी या मानकों में कमी पायी गई वहां विभाग ने नोटिस जारी करने से लेकर लाइसेंस निलंबित करने और कुछ मामलों में प्रतिष्ठानों को बंद कराने तक की सख्त कार्रवाई की हैं। इसके अलावा FDA ने पूरे महाराष्ट्र में 904 छापे मारे और 34.66 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत का प्रतिबंधित गुटखा और पान मसाला जब्त किया है।
इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि यह कार्रवाई केवल निजी संस्थानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मुंबई महानगरपालिका (BMC) की कैंटीन में भी नियमों की अनदेखी पाए जाने पर FDA ने कार्रवाई की। यानी कुल मिलाकर FDA विभाग नियमों के पालन में सरकारी और निजी संस्थानों के बीच किसी तरह का अंतर नहीं कर रहा है।
इसके अलावा विभाग ने स्कूलों में बच्चों के खान-पान को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। जिसमें स्कूल कैंटीनों में जंक फूड की बिक्री पर रोक लगाने की प्रक्रिया तेज की गई है। साथ ही स्कूल परिसरों के आसपास निर्धारित दूरी तक ऐसे खाद्य पदार्थों की बिक्री पर नियंत्रण के निर्देश भी जारी किए गए हैं, ताकि छात्रों को अधिक सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध हो सके।
लेकिन FDA की इस कार्रवाई पर न्यायिक स्तर के सवाल भी उठे हैं। नवी मुंबई के एक पांच सितारा होटल का खाद्य सुरक्षा लाइसेंस रद्द किया गया तो यह पूरा मामला बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा और कोर्ट ने विभाग से पूछा कि क्या हर उल्लंघन पर सीधे लाइसेंस रद्द करना उचित है। अदालत ने यह भी कहा कि कार्रवाई कानून के अनुरूप, निष्पक्ष और परिस्थितियों के अनुरूप होनी चाहिए। हाई कोर्ट ने कहा कि किसी प्रतिष्ठान को बंद करने का असर वहां काम करने वाले कर्मचारियों और उनके परिवारों पर भी पड़ता है। इसलिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना जितना जरूरी है, उतना ही आवश्यक यह भी है कि प्रशासनिक कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया और संतुलित दृष्टिकोण के साथ की जाए।
बता दें कि 2005 बैच के IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे का जन्म महाराष्ट्र के बीड जिले के एक साधारण किसान परिवार में हुआ। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने UPSC परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 20 हासिल कर भारतीय प्रशासनिक सेवा में जगह बनाई। प्रशासनिक सेवा में आने के बाद उन्होंने नगर निगम आयुक्त, जिला कलेक्टर, परिवहन, स्वास्थ्य और अन्य महत्वपूर्ण विभागों में काम किया। और वर्तमान समय में महाराष्ट्र FDA में तुकाराम मुंढे की अगुवाई में चल रही सख्त कार्रवाई ने उन्हें एक बार फिर चर्चा केंद्र में ला दिया है। एक ओर जहां उनके समर्थक उनकी इस कार्रवाई की सराहना कर रहे है वहीं दूसरी ओर आलोचक उनकी कार्यशैली को अत्यधिक कठोर बता रहे हैं। बावजूद इसके तुकाराम मुंढे का नाम आज भी देश के सबसे चर्चित और बेबाक IAS अधिकारियों में शुमार किया जाता है।
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