नई दिल्ली: दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में करीब 11 साल बाद सुप्रीम कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। बुधवार को सर्वोच्च अदालत ने विशेष सीबीआई अदालत द्वारा वर्ष 2015 में जारी किए गए समन और तलब करने के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए कहा कि मामले में उनके खिलाफ संज्ञान लेने का कोई ठोस आधार नहीं था।
देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि जांच एजेंसी की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने और आरोपियों के खिलाफ संज्ञान लेने का निर्णय न्यायिक मानकों के अनुरूप नहीं था।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2005 में ओडिशा के तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा है। उस समय केंद्र में यूपीए सरकार थी और डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री होने के साथ-साथ कुछ समय के लिए कोयला मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे थे।
कोयला ब्लॉक आवंटन को लेकर सामने आए विवाद के बाद सीबीआई ने मामले की जांच की। जांच एजेंसी ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में कहा था कि डॉ. मनमोहन सिंह, उद्योगपति कुमार मंगलम बिरला, पूर्व कोयला सचिव पी.सी. पारख और अन्य के खिलाफ मुकदमा चलाने लायक पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले हैं।
2015 में ट्रायल कोर्ट ने जारी किया था समन
सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के बावजूद वर्ष 2015 में दिल्ली की विशेष सीबीआई अदालत ने रिपोर्ट को खारिज करते हुए डॉ. मनमोहन सिंह, कुमार मंगलम बिरला, पी.सी. पारख और अन्य को आरोपी के रूप में समन जारी कर दिया था। अदालत का मानना था कि उपलब्ध साक्ष्य मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त हैं।
इसके बाद डॉ. मनमोहन सिंह ने विशेष अदालत के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। उनकी ओर से दलील दी गई कि जब स्वयं जांच एजेंसी ने अभियोजन योग्य कोई मामला नहीं पाया, तब ट्रायल कोर्ट द्वारा संज्ञान लेना कानून के अनुरूप नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही लगा दी थी रोक
साल 2015 में पहली सुनवाई के दौरान ही सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अदालत के समन पर रोक लगा दी थी। इसके बाद मामला लंबे समय तक शीर्ष अदालत में लंबित रहा और समन की वैधता पर अंतिम फैसला नहीं हो सका। इस बीच दिसंबर 2024 में डॉ. मनमोहन सिंह का निधन हो गया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
करीब 11 साल बाद सुनवाई पूरी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और सीबीआई की जांच रिपोर्ट का विस्तार से अध्ययन किया है। न्यायालय ने जांच रिपोर्ट को स्वीकार या खारिज करने से जुड़े स्थापित कानूनी मानकों को ध्यान में रखते हुए यह पाया कि सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने और आरोपियों के खिलाफ संज्ञान लेने का कोई ठोस कारण नहीं था।
इस फैसले के साथ ही डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ वर्ष 2015 में जारी समन और विशेष अदालत का आदेश निरस्त कर दिया गया, जिससे कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में उन्हें मरणोपरांत बड़ी कानूनी राहत मिली हैं।
Read Also:Paper Leak Law: भारत सरकार लाएगी नया कानून, 10 साल की सजा, 10 करोड़ का प्रावधान, पढ़िए पूरी जानकारी
