‘प्रदर्शन में कुछ तत्वों ने हिंसा का सहारा लिया’, याचिका सिर्फ प्रचार के लिए...HC में मोदी सरकार की दलील

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केन्द्र की मोदी सरकार ने बुधवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा। सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ने कहा कि सीजेपी का प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं था और प्रदर्शन में शामिल कुछ तत्वों ने हिंसा का सहारा लिया था। सरकार ने अदालत में यह भी कहा कि इस मामले में दायर याचिकाएं सिर्फ प्रचार हासिल करने के लिए दाखिल की गई है। हिंसा में घायल किसी भी व्यक्ति ने एफआईआर दर्ज नहीं कराई है।

एएसजी ने आगे बताया कि जिन लोगों पर कथित तौर पर मारपीट का आरोप लगाया जा रहा है उनमें से किसी ने कोर्ट में याचिका दाखिल नहीं की है। सरकार ने कहा कि इन तथ्यों को देखते हुए याचिकाओं के दावों को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। हालांकि, मामले की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में जारी है।

उल्लेखनीय है कि, 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के आह्वान पर छात्र संसद कूच कर रहे थे। इस आंदोलनकारियों के खिलाफ पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। इस कार्रवाई को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि लोग विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे। सबसे पहला अधिकार, जिसका उपयोग किया जा रहा था, वह था एकत्र होने की स्वतंत्रता और राजनीतिक संघ बनाने का अधिकार।

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उनमें से प्रत्येक प्रदर्शनकारी की शारीरिक अखंडता की रक्षा संविधान द्वारा की गई थी। राज्य (सरकार/पुलिस) की किसी भी कार्रवाई को मनमानेपन के पैमाने पर परखा जाएगा। कोर्ट में कहा गया कि एक शांतिपूर्ण आंदोलन में बड़े पैमाने पर बर्बरता का इस्तेमाल किया गया। यह भीड़ वहां 20 दिनों से जुटी थी। 20 तारीख को यह घोषणा की गई थी कि वे संसद की ओर कूच करेंगे। वहां 19 तारीख तक कोई हिंसा नहीं हुई थी।  

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